पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान का सबसे विस्तृत एवं विशिष्ट भौतिक प्रदेश है। यह थार मरुस्थल (Great Indian Desert) का प्रमुख भाग है। प्राकृतिक, आर्थिक, सामरिक, पर्यावरणीय तथा सांस्कृतिक दृष्टि से यह राजस्थान का अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
इस प्रदेश की पहचान कम वर्षा, अत्यधिक तापांतर, रेतीली भूमि, बालुका स्तूप (Sand Dunes), विरल वनस्पति, पशुपालन तथा सिंचाई आधारित कृषि से होती है।
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान के पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है।
| दिशा (Direction) | सीमा (Boundary) |
|---|---|
| पश्चिम (West) | पाकिस्तान (Pakistan) — अंतर्राष्ट्रीय सीमा |
| उत्तर (North) | पंजाब का मैदानी क्षेत्र (Punjab Plains) |
| पूर्व (East) | अरावली एवं अर्द्ध-शुष्क मैदान (Aravalli & Semi-Arid Plains) |
| दक्षिण (South) | गुजरात का कच्छ क्षेत्र (Kutch, Gujarat) |
यह राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 61.11% भाग है।
✧ ये जिले पूर्णतः मरुस्थलीय प्रदेश में आते हैं।
✧ इन जिलों का कुछ भाग मरुस्थलीय तथा कुछ भाग अन्य प्रदेशों में फैला है।
भौतिक प्रदेश (Physiographic Regions) प्रशासनिक जिलों से पूरी तरह मेल नहीं खाते। कई जिले एक से अधिक भौतिक प्रदेशों में फैले हैं।
भू-आकृति (Relief) किसी क्षेत्र के धरातल का स्वरूप, ऊँचाई, ढाल तथा प्राकृतिक स्थलरूपों का समग्र अध्ययन है। पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की भू-आकृति मुख्यतः पवन (Aeolian Processes) द्वारा निर्मित है।
इस प्रदेश का सबसे विस्तृत स्थलरूप। महीन रेतीली मिट्टी, समतल से हल्की लहरदार सतह, तेज हवाओं का प्रभाव।
पवन द्वारा उड़ाकर लाई गई रेत के एक स्थान पर जमा होने से बनने वाले टीले। पश्चिमी राजस्थान की सबसे विशिष्ट भू-आकृति।
सबसे अधिक — जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर
दो बालुका स्तूपों के बीच स्थित अपेक्षाकृत समतल भूमि। अपेक्षाकृत उपजाऊ, सीमित कृषि, गाँवों की बसावट।
मरुस्थल का वह भाग जहाँ चट्टानी सतह अधिक तथा रेत अपेक्षाकृत कम होती है।
मरुस्थलीय क्षेत्रों में स्थित उथले, बंद, लवणीय अवसाद। वर्षा में अस्थायी जल, ग्रीष्म में शुष्क लवणीय सतह।
जब किसी नदी का जल समुद्र तक नहीं पहुँचता और किसी बंद बेसिन में समाप्त हो जाता है।
कारण: कम वर्षा, समतल ढाल, अधिक वाष्पीकरण
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की जलवायु उष्ण एवं अत्यधिक शुष्क (Hot Arid Climate) है। यह भारत के सर्वाधिक शुष्क क्षेत्रों में से एक है।
राजस्थान के पश्चिमी भाग का अधिकांश क्षेत्र शुष्क मरुस्थलीय जलवायु (Hot Desert Climate — BWh, Köppen Classification) के अंतर्गत आता है।
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान का सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र है।
ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली अत्यधिक गर्म एवं शुष्क हवाएँ। मई–जून में सर्वाधिक प्रभाव।
मरुस्थलीय प्रदेश की प्रमुख विशेषता। तेज हवाएँ, ढीली रेतीली मिट्टी, वनस्पति का अभाव।
इस प्रदेश में सूखा एक सामान्य प्राकृतिक घटना है। कारण: कम वर्षा, अनियमित मानसून, अधिक वाष्पीकरण।
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की मृदा पर जलवायु, पवन, मूल शैल, स्थलाकृति एवं जैविक पदार्थों की कमी का गहरा प्रभाव है। यहाँ की मिट्टियाँ सामान्यतः रेतीली, हल्की, जलधारण क्षमता में कम तथा जैविक पदार्थों से गरीब होती हैं।
इस प्रदेश की सबसे प्रमुख मिट्टी।
वितरण (Distribution): जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलौदी, पश्चिमी जोधपुर
विशेषताएँ (Characteristics):
वितरण (Distribution): जहाँ भूजल लवणीय है अथवा जल निकास की समस्या है।
विशेषताएँ (Characteristics):
इन्दिरा गाँधी नहर क्षेत्र में कुछ स्थानों पर नदी द्वारा लाए गए अवसादों के कारण अपेक्षाकृत अधिक उपजाऊ मिट्टी विकसित हुई है।
| भौतिक गुण (Physical Properties) | विशेषता (Characteristic) |
|---|---|
| बनावट (Texture) | रेतीली (Sandy) |
| संरचना (Structure) | ढीली (Loose) |
| जलधारण क्षमता (Water Holding Capacity) | कम (Low) |
| वायु संचार (Aeration) | अधिक (High) |
| अपवाह (Drainage) | तीव्र (Rapid) |
| अपरदन (Erosion) | पवन द्वारा अधिक (Wind Erosion) |
| रासायनिक गुण (Chemical Properties) | स्थिति (Status) |
|---|---|
| जैविक पदार्थ (Organic Matter) | बहुत कम (Very Low) |
| नाइट्रोजन (Nitrogen) | कम (Low) |
| फॉस्फोरस (Phosphorus) | कम (Low) |
| पोटाश (Potash) | अपेक्षाकृत पर्याप्त (Adequate) |
| कैल्शियम (Calcium) | पर्याप्त (Adequate) |
| लवण (Salts) | अनेक क्षेत्रों में अधिक (High in many areas) |
कम वर्षा, उच्च तापमान, अधिक वाष्पीकरण तथा रेतीली मिट्टी के कारण यहाँ सघन वन विकसित नहीं हो पाते। यहाँ मुख्यतः उष्णकटिबंधीय कंटीली झाड़ीदार वनस्पति (Tropical Thorn Forests) पाई जाती है।
मरुस्थलीय वनस्पति का विकास "जल की उपलब्धता" (Water Availability) द्वारा नियंत्रित होता है।
पश्चिमी राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष। अत्यधिक सूखा सहनशील, गहरी जड़ें, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक।
✧ पशुओं के लिए पत्तियाँ (लूंग) उत्तम चारा। फल (सांगरी) खाद्य एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण।
✧ खेजड़ी को "मरुस्थलीय पारिस्थितिकी का जीवन वृक्ष" (Tree of Life) कहा जाता है।
उच्च गुणवत्ता की लकड़ी, फर्नीचर निर्माण में उपयोग, आकर्षक फूल।
गोंद उत्पादन, पशु चारा, मृदा संरक्षण।
ईंधन, कृषि उपकरण, गोंद, चारा।
लवणीय मिट्टी में भी उगता है, दातन के रूप में उपयोग।
प्रमुख मरुस्थलीय झाड़ियाँ — फोग बालुका स्तूपों को स्थिर करने में सहायक, थोर रसयुक्त तना, आक औषधीय महत्व।
✧ गोडावण विश्व के अत्यंत संकटग्रस्त पक्षियों में से एक है।
स्थान (Location): जैसलमेर, बाड़मेर
स्थान (Location): चूरू (Churu)
| विषय (Topic) | तथ्य (Fact) |
|---|---|
| प्रमुख वनस्पति (Main Vegetation) | उष्णकटिबंधीय कंटीली वनस्पति (Tropical Thorn) |
| सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष (Most Important Tree) | खेजड़ी (Khejri) |
| सबसे महत्वपूर्ण घास (Most Important Grass) | सेवण (Sevan) |
| राजकीय पक्षी (State Bird) | गोडावण (Great Indian Bustard) |
| राजकीय पशु (State Animal) | चिंकारा (Indian Gazelle) |
| प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (National Park) | डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert NP) |
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की कृषि प्राकृतिक परिस्थितियों से अत्यधिक प्रभावित है। इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना के बाद इस क्षेत्र में कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख आधार हैं — (1) कृषि (Agriculture) तथा (2) पशुपालन (Animal Husbandry)।
| फसल (Crop) | प्रमुख जिले (Districts) |
|---|---|
| बाजरा (Pearl Millet) | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर |
| ग्वार (Cluster Bean) | बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर |
| मूंग (Green Gram) | बीकानेर, बाड़मेर |
| मोठ (Moth Bean) | जैसलमेर, बाड़मेर |
| तिल (Sesame) | नागौर, जोधपुर |
| फसल (Crop) | प्रमुख जिले (Districts) |
|---|---|
| गेहूँ (Wheat) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर |
| चना (Gram) | नागौर, जोधपुर |
| सरसों (Mustard) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ |
| जीरा (Cumin) | बाड़मेर, जालौर, नागौर |
| इसबगोल (Isabgol) | बाड़मेर, जालौर |
पशुपालन पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों में से एक है। कम वर्षा एवं सीमित कृषि के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन का विशेष महत्व है।
"मरुस्थल का जहाज" (Ship of the Desert) — परिवहन, पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व।
✧ राजस्थान भारत में ऊँटों की सर्वाधिक संख्या वाले राज्यों में प्रमुख रहा है।
प्रमुख नस्लें (Major Breeds): मगरा (Magra), चोकला (Chokla), नाली (Nali), मारवाड़ी (Marwari)
उपयोग: ऊन (Wool), मांस (Meat)
प्रमुख नस्लें (Major Breeds): सिरोही (Sirohi), मारवाड़ी (Marwari)
पश्चिमी राजस्थान भारत का प्रमुख ऊन उत्पादक क्षेत्र है।
प्रमुख जिले (Districts): बीकानेर, नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर
कम वर्षा (Low Rain) → सीमित कृषि (Limited Agri) → पशुपालन का विकास (Animal Husbandry) → गोबर एवं जैविक खाद (Manure) → कृषि उत्पादकता में वृद्धि (Productivity)
"इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना ने पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश की कृषि को निर्वाह कृषि (Subsistence) से व्यावसायिक कृषि (Commercial) की ओर अग्रसर किया, किन्तु इसके साथ जलभराव (Waterlogging) एवं मृदा लवणीकरण (Salinization) जैसी नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई।"
पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश खनिज संपदा, ऊर्जा उत्पादन, रक्षा, पर्यटन तथा कृषि परिवर्तन के कारण राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख विकास क्षेत्र बन चुका है।
| खनिज (Mineral) | प्रमुख क्षेत्र (Area) | उपयोग (Use) |
|---|---|---|
| पेट्रोलियम (Petroleum) | बाड़मेर बेसिन (Barmer Basin) | ईंधन, पेट्रोकेमिकल उद्योग |
| प्राकृतिक गैस (Natural Gas) | बाड़मेर, जैसलमेर | ऊर्जा एवं उद्योग |
| लिग्नाइट (Lignite) | बाड़मेर, बीकानेर, नागौर | तापीय विद्युत उत्पादन |
| जिप्सम (Gypsum) | बीकानेर, नागौर, जैसलमेर, बाड़मेर | सीमेंट, उर्वरक, प्लास्टर ऑफ पेरिस |
| चूना पत्थर (Limestone) | जैसलमेर, नागौर | सीमेंट उद्योग |
| बेंटोनाइट (Bentonite) | बाड़मेर | ड्रिलिंग, फाउंड्री, सौन्दर्य प्रसाधन |
| मुल्तानी मिट्टी (Fuller's Earth) | बाड़मेर | सौन्दर्य प्रसाधन एवं उद्योग |
जिप्सम (Gypsum) उत्पादन में राजस्थान का भारत में अग्रणी (Leading) स्थान है।
पश्चिमी राजस्थान में भारत के सर्वाधिक सौर विकिरण (Highest Solar Radiation) वाले क्षेत्र स्थित हैं।
कारण: वर्ष भर साफ आकाश, अधिक धूप वाले दिन, विशाल समतल भूमि।
प्रमुख क्षेत्र (Areas): जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलौदी, जोधपुर
तेज एवं नियमित हवाओं के कारण पश्चिमी राजस्थान पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
प्रमुख क्षेत्र (Areas): जैसलमेर, बाड़मेर
लिग्नाइट एवं अन्य ईंधनों पर आधारित तापीय परियोजनाएँ भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख मेले एवं उत्सव (Fairs & Festivals): जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल, ऊँट उत्सव (बीकानेर)
| विषय (Topic) | तथ्य (Fact) |
|---|---|
| प्रमुख खनिज (Major Minerals) | पेट्रोलियम, जिप्सम, लिग्नाइट |
| प्रमुख ऊर्जा (Major Energy) | सौर एवं पवन (Solar & Wind) |
| प्रमुख पर्यटन (Major Tourism) | जैसलमेर (Jaisalmer) |
| प्रमुख उद्योग (Major Industries) | ग्वार गम, सीमेंट, ऊन |
| प्रमुख पर्यावरणीय समस्या (Major Environmental Issue) | मरुस्थलीकरण (Desertification) |
उत्तर लिखते समय निम्न पाँच बिंदुओं का अवश्य उल्लेख करें —
"पश्चिमी मरुस्थल — 5 'K' का राज्य" (5 'K' Formula)
| भ्रम (Confusion) | वास्तविकता (Reality) |
|---|---|
| अरावली मानसून को रोकती है | अरावली मानसून के समानांतर है, इसलिए नहीं रोकती |
| पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा | सर्वाधिक वर्षा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (बांसवाड़ा, झालावाड़) में |
| बाजरा केवल चारे के लिए | बाजरा मुख्य खाद्यान्न फसल है |
| गोडावण राज्य पशु है | गोडावण राजकीय पक्षी है; राजकीय पशु चिंकारा है |
| इन्दिरा गाँधी नहर से केवल लाभ | लाभ के साथ जलभराव एवं लवणीकरण भी |